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आरक्षण : सामाजिक परिवर्तन का हथियार – दुर्गेश यादव “गुलशन”

बाबा साहेब अम्बेडकर/ आरक्षण

आज उदारीकरण और खुली अर्थव्यवस्था का दौर चल रहा है जिसमें समाज व देश को कई फायदे हुए हैं। इसके साथ ही निजीकरण की व्यवस्था भी समाज में व्याप्त हो रही है। निजी क्षेत्र में कार्य करने के घंटे बड़े तथा वेतन कम हुआ है। कार्य करने की सुविधाएं भी समान नहीं होती है। इसके साथ साथ जाती व लिंग के आधार पर भेदभाव भी अधिक होता है।

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बाबासाहब अम्बेडकर और बुद्ध जैसे महामानव को ही सभ्यता डालते हैं

बाबासाहब

बाबासाहब: 6 दिसंबर महापरिनिर्वाण दिवस एवं संकल्प दिवस वर्ष 2017 कल्पप्रवर्तक, बहुजन समाज एवं महिलाओं के मुक्तिदाता धम्मचक्र प्रवर्तक डॉ बाबासाहब आंबेडकर महापुरुषों की श्रेणी में आगे देखते हैं, क्योंकि नेताओं के कार्यकाल 25 से 30 साल होते हैं, महापुरुषों के कार्यकाल 200 से 300 साल तक चलता है, लेकिन …

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किसान आन्दोलन का राजनीतिक अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से परिप्रेक्ष्य क्या है ?

किसान आन्दोलन

मौजूदा दौर के किसान आन्दोलन और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का सवाल: – अनु राठी पिछले कुछ समय से देश के अलग–अलग हिस्सों में किसान आन्दोलन उठते रहे हैं। हाल में राजस्थान के सीकर और कई अन्य ज़ि‍लों में हुए किसान आन्दोलन की भी काफ़ी चर्चा है। इस …

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अछूत का सवाल : शहीद भगतसिंह का जाति के प्रति नजरिया

अछूत का सवाल

अछूत का सवाल : इन लेखों को कहीं आगे फॉरवर्ड करने से पहले खुद जरूर पढ़िए। WhatsApp/facebook पर लोगों की आदत होती है कि कोई अच्छी चीज देखते हैं तो फॉरवर्ड करते हैं और उसके बाद खुद ही भूल जाते हैं। भगत सिंह को सच्ची सलामी यही हो सकती है …

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मानव का स्वभाव मूलरूप से विनाशकारी है, पर्यावरणविद व वैज्ञानिक के तर्क -नवमीत

मानव का स्वभाव

मानव का स्वभाव मूलरूप से विनाशकारी है, पूँजीवाद और महाविनाश की आहट पृथ्वी यूँ तो ब्रह्माण्ड का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है। लेकिन साथ ही यह सबसे विशिष्ट हिस्सा भी है। इस विशिष्टता का कारण यह है कि पृथ्वी ही एकमात्र ज्ञात स्थान है जहाँ ब्रह्माण्ड की सबसे …

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कमजोर : विश्‍व प्रसिद्ध कथाकार अंतोन चेखव की लघुकथा …(हिसाब चुकता)

कमजोर

कमजोर : आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूलिमा वार्सीयेव्जा का हिसाब चुकता करना चाहता था। ”बैठ जाओ, यूलिमा वार्सीयेव्जा।” मेंने उससे कहा, ”तुम्हारा हिसाब चुकता कर दिया जाए। हाँ, तो फैसला हुआ था कि तुम्हें महीने के तीस रूबल मिलेंगे, हैं न?” ”नहीं,चालीस।” ”नहीं तीस। तुम हमारे यहाँ दो …

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हे नारद, मेरी सुनो (कविता) – उदय मोहन पाठक (अधिवक्ता)

हे नारद

हे नारद ‘ : आजादी के इतने वर्ष बीत जाने जाने के बाद भी जब शोषित, पीड़ित, गरीब, लोगों को देखता हूँ तो मन में एक भाव आता है कि कोई ऐसा बहुजन हिताय कार्य करने वाला मसीहा अवतरित हो जो इनके पीड़ा को हर ले और समाज में समानता …

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जाति विरोधी संघर्षों के बिना भारत में क्रान्ति सम्भव नहीं! -बिगुल

जाति उन्मूलन

भारत में जाति व्यवस्था : उद्भव, विकास और उन्मूलन का सवाल’ विषय पर परिचर्चा भारत में बिना क्रान्ति जाति उन्मूलन सम्भव नहीं, ‘गत 12 फ़रवरी को हरियाणा के रोहतक शहर के ‘आर्इएमए हाउस’ में अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच की ओर से ‘भारत में जाति व्यवस्था : उद्भव, विकास और उन्मूलन …

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मुंशी प्रेमचंद : उनका समय और हमारा समय : निरंतरता और परिवर्तन के द्वंद्व

मुंशी प्रेमचंद , उनका समय और हमारा समय

मुंशी प्रेमचंद को जानने के लिए ये लेख जरूर पढ़ें (…कविता कृष्‍णपल्‍लवी) मुंशी प्रेमचंद की 300 से अधिक कहानियों में से कम से कम 20 तो ऐसी हैं ही, जिनकी गणना विश्व की श्रेष्ठतम कहानियों में की जा सकती है और जिनकी बदौलत उनका स्थान मोपासां, चेखोव आदि श्रेष्ठतम कथाकारों …

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हल्कू ने आकर स्त्री से कहा… कथा सम्राट प्रेमचंद के जन्‍मदिवस 31 जुलाई

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा...

 (हल्कू ने आकर स्त्री से कहा…)  “पूस की रात” हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूं, किसी तरह गला तो छूटे. प्रेमचंद का लेखन और उनकी रचनाएं जितनी प्रासंगिक उस समय में थीं, जब वह रची गईं, उतनी ही आज …

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बच्चो को परिवार का महत्व समझाओ

एक पार्क मे दो बुजुर्ग बैठे बातें कर रहे थे..! पहला :– मेरी एक पोती है..! शादी के लायक है..! BA किया है..! job करती है..! कद -5″2 इंच है..! सूंदर है..! कोई लड़का नजर में हो तो बताइएगा..! दूसरा :– ” आपकी पोती को किस तरह का परिवार चाहिए..? …

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गाय की मदद से बनाया जा सकता है एड्स का टीका

अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में गाय काफी मददगार साबित हो सकती है. प्रतिरक्षा के तौर पर ये जानवर लगातार ऐसे विशेष एंटीबॉडीज प्रोड्यूस करते हैं जिनके जरिए एचआईवी को खत्म किया जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि कॉप्लेक्स …

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आधार पर सरकारी ज़बर्दस्ती की वजह क्या है?

✍मुकेश असीम मोदी सरकार द्वारा आधार के दायरे को व्यापक बनाने का कार्य निरन्तर जारी है। 2009 में जब तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा आधार कार्ड बनाने की योजना शुरू की गयी थी, तो कहा गया था कि इसमें पंजीकरण करवाना स्वैच्छिक होगा। इसका उपयोग शंका की स्थिति में किसी व्यक्ति …

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निर्वाचन कार्ड एवं ईवीएम को आधार कार्ड से लिंक करने की जरूरत- सूरज कुमार बौद्ध

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। श्री रामनाथ कोविंद जी भारत के अगले राष्ट्रपति होंगे। मैं कुछ आगे लिखूं इससे पहले श्री रामनाथ कोविंद को भारत के राष्ट्रपति चुने  जाने पर मेरा हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। राष्ट्रपति चुनाव एवं बैलेट पेपर का इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा बैलेट …

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आज के सुविचार

हौसले के तरकस में कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो हार जाओ चाहे ज़िंदगी में सब कुछ लेकिन फिर से जीतने की उम्मीद ज़िंदा रखो । This post was written by sanjay dash. The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

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ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम

सत्यम मनुष्य हमेशा ही ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने की कोशिश करता रहा है।  हज़ारों साल पहले जब मनुष्य जंगलों में रहता था तब उसे प्रकृति के रहस्य जादू-टोने की तरह लगते थे और वह मौसम बदलने, बिजली गिरने, जीवन और मृत्यु जैसी प्राकृतिक घटनाओं को अदृश्य और जादुई शक्तियों …

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साम्प्रदायिकता और संस्कृति

साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी संस्कृति को कयामत तक …

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आज के सुविचार

जिसे समय का सदुपयोग करने की कला आ गई, उसने सफलता के रहस्य को समझ लिया है | This post was written by sanjay dash. The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

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आज के सुविचार

जीना है तो अपने हिसाबसे जिओ लोगों की सोच का क्या, वो परिस्थितियों के हिसाब से बदलती रहती है, अगर चाय में मक्खी गिरे तो लोग चाय फेंक देते हैं, और अगर देसी घी में गिरे तो लोग घी नहीं बल्कि मक्खी को फेंक देते हैं | This post was …

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भाइयों के होते एक बहन की अस्मत कैसे लुट सकती है

रोहित ,प्रभात और चिराग कोचिंग से लौट रहे थे . प्रभात की नज़र तभी सुनसान पड़ें खाली प्लॉट में चार लड़कों से घिरी मदद के लिए पुकारती लड़की पर गयी . प्रभात ने अपना बैग कंधें से उतार कर सड़क पर फेंका और ”मेरी बहन को छोड़ दो कमीनों ” …

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