Breaking News
Home / स्टडी मटेरियल

स्टडी मटेरियल

STUDY_MATERIAL

GST एक विस्तृत परिचय -(Part-1)बिक्री/सप्लाई पर दो करों को एकत्र करना

GST एक विस्तृत परिचय

GST के दौरान आपको प्रारंभिक से यह देखना है कि अब आपको एक ही बिक्री /सप्लाई पर दो करों को एकत्र करना है और इस कानून का पालन यह माल एवं सेवाओं को मिलाते हुए करना है . ये दो कर निम्न प्रकार होंगे :- (1).राज्य का GST (राज्य  के खाते …

Read More »

मुंशी प्रेमचंद : उनका समय और हमारा समय : निरंतरता और परिवर्तन के द्वंद्व

मुंशी प्रेमचंद , उनका समय और हमारा समय

मुंशी प्रेमचंद को जानने के लिए ये लेख जरूर पढ़ें (…कविता कृष्‍णपल्‍लवी) मुंशी प्रेमचंद की 300 से अधिक कहानियों में से कम से कम 20 तो ऐसी हैं ही, जिनकी गणना विश्व की श्रेष्ठतम कहानियों में की जा सकती है और जिनकी बदौलत उनका स्थान मोपासां, चेखोव आदि श्रेष्ठतम कथाकारों …

Read More »

कश्मीर की समस्या आधी हो जायेगी, 370 हटाने से पहले सरकार कर ले यह काम

कश्मीर की समस्या

कश्मीर की कारस्तानी का अगर जायजा लेना हो तो आपको जम्मू कश्मीर विधानसभा की सीटों का विश्लेषण करना होगा। J & K का असली क्षेत्रफल 222236 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से भारत के पास सिर्फ 101387 वर्ग किलोमीटर इलाका है जो लद्दाख, जम्मू और कश्मीर तीन हिस्सों में विभक्त है …

Read More »

समसामयिकी

1.डोकलाम गतिरोध के बीच डोभाल और यांग ने की मुलाकात • सिक्किम सेक्टर में भारत और चीन के बीच गतिरोध की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष एवं स्टेट काउंसिलर यांग जेची ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक से इतर मुलाकात …

Read More »

आधार पर सरकारी ज़बर्दस्ती की वजह क्या है?

✍मुकेश असीम मोदी सरकार द्वारा आधार के दायरे को व्यापक बनाने का कार्य निरन्तर जारी है। 2009 में जब तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा आधार कार्ड बनाने की योजना शुरू की गयी थी, तो कहा गया था कि इसमें पंजीकरण करवाना स्वैच्छिक होगा। इसका उपयोग शंका की स्थिति में किसी व्यक्ति …

Read More »

​बेहिसाब बढ़ती महँगाई यानी ग़रीबों के ख़िलाफ सरकार का लुटेरा युद्ध

यह सरकार की जनविरोधी, कॉरपोरेट-परस्त नीतियों का नतीजा है सम्पादक मण्डल, मज़दूर बिगुल ‘बहुत हुई महँगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’ के लुभावने नारे से बेहिसाब महँगाई की मार झेल रही जनता के एक हिस्से को भरमाकर उसके वोट बटोरने के बाद भाजपा की अपनी महँगाई तो दूर हो …

Read More »

लापता विमान एमएच370 की खोज के दौरान सामने आई समुद्र की अनदेखी दुनिया

सिडनी, 20 जुलाई (एएफपी) लापता विमान एमएच 370 की गहन खोज के दौरान समुद्र की वह अनदेखी दुनिया सामने आई है जिसका हिस्सा ज्वालामुखी, गहरी घाटियां और चट्टानें हैं। ऑस्ट्रेलिया द्वारा जारी किए गए विस्तृत नक्शों में यह बात सामने आई है। हालांकि दक्षिण हिंद महासागर में तलाशी में मलेशियाई …

Read More »

विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के बहाव क्षेत्र का कुओं की मदद से पता किया जायेगा

नयी दिल्ली 20 जुलाई (भाषा) विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिये हरियाणा सरकार के सरस्वती धरोहर बोर्ड और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के बीच आज समझौता किया गया। इसके तहत सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग में ओएनजीसी द्वारा 100 कुंये बनाकर नदी के प्रवाह की …

Read More »

निर्वाचन कार्ड एवं ईवीएम को आधार कार्ड से लिंक करने की जरूरत- सूरज कुमार बौद्ध

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। श्री रामनाथ कोविंद जी भारत के अगले राष्ट्रपति होंगे। मैं कुछ आगे लिखूं इससे पहले श्री रामनाथ कोविंद को भारत के राष्ट्रपति चुने  जाने पर मेरा हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। राष्ट्रपति चुनाव एवं बैलेट पेपर का इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा बैलेट …

Read More »

ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम

सत्यम मनुष्य हमेशा ही ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने की कोशिश करता रहा है।  हज़ारों साल पहले जब मनुष्य जंगलों में रहता था तब उसे प्रकृति के रहस्य जादू-टोने की तरह लगते थे और वह मौसम बदलने, बिजली गिरने, जीवन और मृत्यु जैसी प्राकृतिक घटनाओं को अदृश्य और जादुई शक्तियों …

Read More »

साम्प्रदायिकता और संस्कृति

साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी संस्कृति को कयामत तक …

Read More »

सामाजिक-आर्थिक शोषण से त्रस्त

मुकेश असीम 1931 की जनगणना के अनुसार देश में 27 लाख घरेलू कामगार थे, अधिकाँश पुरुष। स्वतंत्रता के पश्चात् साहबी कम हुई, जमींदारों की बेगार बंद हुई और विस्तार लेती पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में नई सरकारी-निजी नौकरियाँ आईं तो 1971 में यह तादाद घटकर 67 हजार रह गई। उसके बाद 80 …

Read More »

चाइनीज सामान के बहिष्कार के पीछे छिपी हुई तुच्छ  राजनीतिक मंशा- सूरज कुमार बौद्ध

चीनी सामान का बहिष्कार करो, चीनी झालर का बहिष्कार करो, मिट्टी वाले दिया जलाओ, स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ……. आदि। पिछले कुछ सालों से इस तरह की राजनीति खूब चमकाई जा रही है। जैसे दीपावली आती है तो कुछ चीनी झालर का विरोध करने लगेंगे, होली के आते ही चीनी रंगों …

Read More »

मोदी की नोटबन्दी ने छीने लाखों मज़दूरों से रोज़गार

मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष अक्टूबर में घोषित की गयी नोटबन्दी से काले धन का कुछ भी नहीं बिगड़ा। न ही सरकार का ऐसा कोई इरादा ही था। काले धन और भ्रष्टाचार के ख़ात्मे की सभी बातें हवाई थीं। पिछले आठ महीनों में यह साबित हो चुका है। जब देश …

Read More »

हम बढ़ते चलेंगे – सूरज कुमार बौद्ध 

अगर मानव अधिकारों के उल्लंघन को एक आधार मानकर देखा जाए तो भारत की पहचान एक जातीय हिंसा और उत्पीड़नकारी देश के रुप में की जाती है। यहां प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक, पंचायत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक हर जगह जातिवाद समाहित है। यह जातिवाद का दंश ही …

Read More »

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की प्रगति के संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर सफाई 

हाल की मीडिया रिपोर्टों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के संबंध में कुछ सवाल उठाये गये हैं। मीडिया रिपोर्टों में भ्रामक तथ्यों को सही साबित करने के लिए राष्ट्रीय सर्वेक्षण की बातों का हवाला दिया गया है और कहीं-कहीं गलत उद्धरण भी दिये गये हैं। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय तथ्यात्मक …

Read More »

राहुल सांकृत्यायन का लेख – तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के भेद से, रंग के भेद से। हमारे यहाँ एक ही भाषा बोलने वाले, एक ही रंग के आदमियों की भिन्न-भिन्न जातें होती हैं। यह अनोखा जाति-भेद …

Read More »

दुनिया की छब्बीस भाषाओं के जानकार राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन सच्चे अर्थों में जनता के लेखक थे। वह आज जैसे कथित प्रगतिशील लेखकों सरीखे नहीं थे जो जनता के जीवन और संघर्षों से अलग-थलग अपने-अपने नेह-नीड़ों में बैठे कागज पर रोशनाई फि़राया करते हैं। जनता के संघर्षों का मोर्चा हो या सामंतों-जमींदारों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ़ किसानों की …

Read More »

​हर पाँच में चार लोग अपराध साबित हुए बिना ही भारतीय जेलों के नर्क के क़ैदी हैं

इनमें 90 प्रतिशत लोग ग़रीब और वंचित समुदायों से हैं अमेन्द्र कुमार आम तौर पर जेल और क़ैदी का नाम सुनते ही दिमाग़ में क्रूर खूँखार क़िस्म के व्यक्तियों की तस्वीर उभरती है। लेकिन बिना अपराध के जेलों में बन्द ग़रीब मज़दूर लोग हमारी नज़रों से ग़ायब हो जाते हैं। …

Read More »

शरीर गलाकर, पेट काटकर जी रहे हैं मज़दूर

सरकारी आँकड़ों में दावा किया जाता है कि देश के ग़रीबों को भी पहले से बेहतर खाना मिलने लगा है। इन दावों के झूठ की पोल खोलने के लिए बहुत-से अर्थशास्त्री दूसरे आँकड़े भी पेश करते हैं जो बताते हैं कि पिछले बीस वर्षों में जबसे देश में ”विकास” का …

Read More »