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आज़ादी! “स्त्री क्या आज़ादी चाहती है?”

आज़ादी!

आज़ादी का क्या मतलब हो सकता है ? आज़ादी! स्त्री आज़ादी चाहती है?… बुनियादी सवाल यह नहीं है कि स्त्री क्या चाहती है, बल्कि यह है कि उसे क्या चाहना चाहिए, उसकी चाहत क्या होनी चाहिए, या वस्तुगत तौर पर स्त्री की मनुष्य्ता की शर्तें क्या हो सकती हैं। स्त्री क्या …

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हरिशंकर परसाई की कलम से – शर्म की बात पर ताली पीटना

मैं आजकल बड़ी मुसीबत में हूं।मुझे भाषण के लिए अक्सर बुलाया जाता है। विषय यही होते हैं- देश का भविष्य, छात्र समस्या, युवा-असंतोष, भारतीय संस्कृति भी(हालांकि निमंत्रण की चिट्ठी में ‘संस्कृति’ अक्सर गलत लिखा होता है), पर मैं जानता हूं जिस देश में हिंदी-हिंसा आंदोलन भी जोरदार होता है, वहां …

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सेल्फ़ी संस्कृति- पूँजीवादी युग में अलगाव एवं व्यक्तिवाद की चरम अभिव्यक्ति

यूनानी पौराणिक कथाओं में नार्सिसस नामक एक मिथकीय चरित्र का वर्णन मिलता है जो किसी अन्य व्यक्ति के साथ कोई स्नेह या लगाव नहीं रखता था, लेकिन तालाब में दिखे अपने ही प्रतिबिम्ब के प्रति वह इस कदर सम्मोहित हो गया था कि जब उसे यह एहसास हुआ कि वह …

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बच्ची गोद लेने पर सनी लियोन को गाली देने वाले लोग मनुवादी हैं: सूरज कुमार बौद्ध

पुरुषवादी समाज महिलाओं के प्रति अपनी संकुचित मानसिकता को बदलने का नाम नहीं ले रहा। महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाना तथा उनकी आजादी पर पाबंदी पुरुषवादी समाज का प्रमुख अंश है। अब सवाल यह होता है कि समाज कब मानेगा कि एक औरत को वेश्या बनने पर …

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महर्षि अरविन्द से महामहिम कोविन्द तक गरीबों और किसानों की बात , फिर भी समस्या जस की तस !

महर्षि अरविन्द से महामहिम कोविन्द तक गरीबों और किसानों की बात , फिर भी समस्या जस की तस ! आखिर इस मर्ज की दवा क्या है ? मित्रों ! विजय के तत्काल बाद देश के भावी महामहिम माननीय कोविन्द जी का प्रथम वक्तव्य उनकी आत्मा की आवाज थी ,जिसने कोटि …

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निर्वाचन कार्ड एवं ईवीएम को आधार कार्ड से लिंक करने की जरूरत- सूरज कुमार बौद्ध

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। श्री रामनाथ कोविंद जी भारत के अगले राष्ट्रपति होंगे। मैं कुछ आगे लिखूं इससे पहले श्री रामनाथ कोविंद को भारत के राष्ट्रपति चुने  जाने पर मेरा हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। राष्ट्रपति चुनाव एवं बैलेट पेपर का इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा बैलेट …

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भ्रष्टाचार की ताकत का नैतिकता से कोई सरोकार नहीं (पंजाब केसरी)

हमारी व्यवस्था की हास्यास्पद स्थिति देखिए। व्यवस्था में असमानता देखिए। एक दसवीं फेल बिहार का उपमुख्यमंत्री है और तमिलनाडु में शिक्षक भर्ती बोर्ड द्वारा उस छात्र को प्रवेश नहीं दिया गया जिसके 90 की बजाय 89 अंक आए थे। बिहार के उपमुख्यमंत्री बड़े गर्व से कहते हैं मुझे तो जनता …

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घरेलु कामगार – नयी सदी के गुलाम

1931 की जनगणना के अनुसार देश में 27 लाख घरेलू कामगार थे, अधिकाँश पुरुष| स्वतंत्रता के पश्चात् साहबी कम हुई, जमींदारों की बेगार बंद हुई और विस्तार लेती पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में नई सरकारी-निजी नौकरियाँ आईं तो 1971 में यह तादाद घटकर 67 हजार रह गई| उसके बाद 80 के दशक …

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साम्प्रदायिकता और संस्कृति

साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी संस्कृति को कयामत तक …

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भारत की न्यायपालिका पर 400 परिवारों का ही कब्जा

कोलेजियम सिस्टम से जजों के रिश्तेदार ही बनते रहे हैं जज, जो अत्यन्त विचारणीय है | भारत के मा0 सर्वोच्च न्यायालय व मा0 उच्च न्यायालय में मात्र 400 परिवारों का ही कब्जा है और जो जज है उन्हीं के ही बेटा, बेटी, जीजा, साला, नातेदार, रिश्तेदार ही जज बनते आ …

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वे आ रहे हैं

वे आ रहे हैं. वे हजारों की संख्या में आ रहे हैं. हो सकता है भाषा का व्याकरण अनगढ़ हो. हेडलाइन में गलतियां हों. हो सकता है कि कैमरा देखकर बोलने का आत्मविश्वास न आया हो, जो वैसे भी पीढ़ियों में आता है, हो सकता है कि उन्होंने अपना वीडियो …

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चाइनीज सामान के बहिष्कार के पीछे छिपी हुई तुच्छ  राजनीतिक मंशा- सूरज कुमार बौद्ध

चीनी सामान का बहिष्कार करो, चीनी झालर का बहिष्कार करो, मिट्टी वाले दिया जलाओ, स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ……. आदि। पिछले कुछ सालों से इस तरह की राजनीति खूब चमकाई जा रही है। जैसे दीपावली आती है तो कुछ चीनी झालर का विरोध करने लगेंगे, होली के आते ही चीनी रंगों …

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अब एकलव्य भारी पड़ रहे हैं द्रोणाचार्यों पर…

मुख्यधारा की मीडिया से अलग धर्म क्रांति को हवा दे रहे अंकुश गायकवाड.. बहुजनों की काबिलियत को कमतर आंका जाना भारतीय मीडिया और जनमानस की फितरत बन चुकी है। काबिलियत किसी कौम या जाति विशेष की मोहताज नहीं होती है। असली सवाल अवसर का होता है। बहुजनों में तो एकलब्य जैसी काबिलियत छुपी हुई है लेकिन यहां के द्रोणाचार्यों की …

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​Digital India needs a cyber security reboot (Livemint)

July 1, 2017 Abhishek Poddar, Anchit Goel The Indian government has embarked on a programme to turn the country into a digital economy. It has unveiled a series of initiatives—from introducing Digital Locker, which eliminates the need for people to carry hard copies of documents issued by the government, to …

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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST)

कौटिल्य की अमूल्य रचना अर्थशास्त्र के अनुसार, कर ऐसा हो कि व्यापार और उद्यम पर अंकुश न लगे, वाणिज्य में सुगमता हो और कर दो बार न लगे। कौटिल्य ने चेतावनी दी थी कि यदि इन सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ, तो व्यापारी दूसरे राज्यों में चले जाएंगे। वैश्वीकरण के …

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​नया दौर (हिन्दुस्तान)

July 1, 2017  भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए कर सुधार कोई नया शब्द नहीं है। दुनिया के तमाम दूसरे देशों की तरह ही हम भी कई दशकों से ऐसा तरीका खोजने और अपनाने में जुटे हुए हैं, जिससे लोग और उद्योग खुशी-खुशी अपनी कमाई का एक हिस्सा सरकार के …

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हूल दिवस

आज यानीं 30 जून 1855 को झारखण्ड के चार महान क्रांतिकारियों सिद्धू, कान्हू, भैरव, चाँद एवम दो बहनों झानो,फूलो द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ संथाल विद्रोह की शुरुवात की गईं थी। संथाल विद्रोह को हूल विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। 30 जून को झारखण्ड सरकार हूल दिवस के …

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छोटे पड़ावों में न उलझें (प्रभात खबर)

तरुण विजय पूर्व सांसद, राज्यसभा विवेकानंद और वीर सावरकर के जो भक्त गाय पर इतना उद्वेलित हो रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि केवल उत्तर भारत और वहां के एक बड़े सामाजिक वर्ग को ही समूचा भारत नहीं माना जा सकता.कृपया विवेकानंद और सावरकर को दोबारा पढ़ें. जैसे हिंदी सारा …

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उलटा राग (जनसत्ता)

चीन के साथ भारत का सीमा विवाद पुराना है। कभी-कभी इसकी वजह से दोनों तरफ के सैनिक टकरा जाते हैं, या गलतफहमी पैदा हो जाती है, पर यह अक्साई चिन या अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा पर होता आया है। इस लिहाज से, ताजा तकरार नई घटना है, क्योंकि यह …

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साइबर संकट (जनसत्ता)

सैंतालीस दिनों के भीतर एक बार फिर हुए साइबर हमले से कई मुल्कों के सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं में सर्वर ठप हो गया और कामकाज रुक गया। विडंबना यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन और रूस जैसे तकनीक में काफी आगे बढ़े देशों के वैज्ञानिक भी इस मर्ज का न …

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